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大悲咒 正本

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नमो रत्न त्रयाय। नमआर्या वलोकिते ष्वराय। बोधि सत्त्वाय। महासत्त्वाय| महाकारुनणिकाय।
ॐ सर्व रविये। सुधनदस्य। नमस्कृत्वा इममार्या। वोलोकिते ष्वर रंधव। नमो नरकिन्दि।
ह्रीः महा वत्स्वामे। सर्व अर्थतो षुभं। अजेयं। सर्व सत् वषट् नमो वाक। मविततो। तद्यथा।
ॐ अवलोकि। लोकते। क्रते। ए ह्रीः महा बोधिसत्त्व। सर्व सर्व। मल मल। महिम ह्र्दयं।
कुरु कुरु कर्नं। धुरु धुरु विजयते। महा विजयते। धर धर। ध् ऋनी। ष्स्वरय।
चल चल। मम विमल। मुक्तेले। एहि एहि। षिन षिन।आर्षं प्रसरि। विष्व विष्वं। प्रसय।
हुलु हुलु नर। हुलु हुलु ह्रीः सर सर। सिरि सिरि। सुरु सुरु। बोधिय बोधिय। बोधय बोधय।
मैत्रेय। नरकिन्दि। धृष्णिन। भयमन। स्वाहा। सिद्धाय। स्वाहा। मआ सिद्धाय। स्वाहा।
सिद्धयोगे। ष्वराय। स्वाहा। नरकिन्दि। स्वाहा। मारणर। स्वाहा। षिर सिं ह मुखाय। स्वाहा।
सर्व महा असिद्धाय। स्वाहा। चक्र असिद्धाय। स्वाहा। पद्म कस्ताय। स्वाहा। नरकिन्दि वगलाय। स्वाहा।
मवरि षण्खर्य। स्वाहा। नमो रत्न त्रयाय। नम आर्या। वालोकिते। ष्वराय। स्वाहा।
ॐ सिध्यन्तु। मन्त्र। पदया। स्वाहा।


1楼2014-12-30 22:45回复